Saturday, 21 September 2013

घरेलु हादसे- 'कौशल' का कौशल

शनिवार का ज़िन्दगी में बड़ा महत्व है। फुर्सत के लम्हों में नए विचारों का जन्म होता है। शनि देव की कृपा से मुझे लिखने की प्रेरणा भी इसी दिन मिलती है।
शाम को चाय का वक़्त हुआ। मैडम को काफी खोजने के बाद भी अदरक नहीं मिल रहा था।  अलमारी, फ्रीज में भी नहीं दिखा।  ६ बजे कौशल आया।  उसे पाक कला में कौशल प्राप्त है और वह  रात का खाना बनाता है।
" कौशल, अभी अदरक मंगाया था, कैसे ख़त्म हो गया? " मैडम ने चाय में चीनी डालते हुए पूछा।
" बाहर रखा है , अभी लाता हूँ" कौशल बगीचे की तरफ जाते हुए बोला।  मन में शंकाएँ लिए हम दोनों भी उसके पीछे गए।  प्याज़, अदरक को आजकल जेवरों की तरह हिफाज़त से रखना पड़ता है।  बगीचे में कौशल ने मिट्टी खोदी। अदरक निकला।
हम दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी। अदरक के बगल में  उसने मिट्टी में धनिया गाड़ रखी थी।
" फ्रीज में ताजा नहीं रहता मैडम , इसलिए यहाँ रखता हूँ" कौशल ने मासूमियत से बताया। उसका घरेलु इनोवेशन देखकर हम खुश हो रहे थे।  महत्वाकंशी इंजिनियर, वैज्ञानिक तो इतनी देर में पेटेंट भी करा दें। पर वो कम पढ़ा लिखा, इंटर पास है। अपेक्षाएं कम, योगदान ज्यादा करता है ।
 " तुम्हारी चाये भी चढ़ा दी थी मैंने, पी लेना" मैडम ने इनाम देते हुए कौशल को कहा।












  

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